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bhagavat 10.78.35: ऋषियों ने कहा: हे राम, आप इस प्रकार कार्य करें कि आपकी शक्ति और आपके कुश अस्त्र की शक्ति बनी रहे और हमारे दिए हुए वचन का पालन हो; साथ ही रोमहर्षण की मृत्यु भी सुनिश्चित हो।   |   bhagavat अध्याय 10.78: दन्तवक्र, विदूरथ तथा रोमहर्षण का वध   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 78: दन्तवक्र, विदूरथ तथा रोमहर्षण का वध  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  10.78.35 
ऋषय ऊचु:
अस्‍त्रस्य तव वीर्यस्य मृत्योरस्माकमेव च ।
यथा भवेद्वच: सत्यं तथा राम विधीयताम् ॥ ३५ ॥
 
 
अनुवाद
ऋषियों ने कहा: हे राम, आप इस प्रकार कार्य करें कि आपकी शक्ति और आपके कुश अस्त्र की शक्ति बनी रहे और हमारे दिए हुए वचन का पालन हो; साथ ही रोमहर्षण की मृत्यु भी सुनिश्चित हो।
 
The sages said: O Rama, please do something so that your power and that of your Kusha weapon, as well as our word and the death of Romaharshana, may all remain.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)