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bhagavat 10.78.34: हे मुनियों, तुम लोग कुछ कहो तो, मैं अपनी दिव्य शक्ति द्वारा तुम्हारे द्वारा उसे दिए सभी वचनों को पूरा कर दूँगा - उसकी दीर्घायु, शक्ति और इंद्रिय शक्ति को लौटा दूँगा।   |   bhagavat अध्याय 10.78: दन्तवक्र, विदूरथ तथा रोमहर्षण का वध   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 78: दन्तवक्र, विदूरथ तथा रोमहर्षण का वध  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  10.78.34 
दीर्घमायुर्बतैतस्य सत्त्वमिन्द्रियमेव च ।
आशासितं यत्तद्ब्रूते साधये योगमायया ॥ ३४ ॥
 
 
अनुवाद
हे मुनियों, तुम लोग कुछ कहो तो, मैं अपनी दिव्य शक्ति द्वारा तुम्हारे द्वारा उसे दिए सभी वचनों को पूरा कर दूँगा - उसकी दीर्घायु, शक्ति और इंद्रिय शक्ति को लौटा दूँगा।
 
O sages, please tell me something. Whatever promises you have made to him for long life, strength and sensory power, I will fulfill them.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)