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bhagavat 10.78.33: ईश्वर ने कहा: मैं इस हत्या के प्रायश्चित अवश्य करूँगा क्योंकि मैं साधारण मनुष्यों पर दया दिखाना चाहता हूँ। इसलिए कृपया मुझे बताएँ कि पहले किस अनुष्ठान को करना चाहिए।   |   bhagavat अध्याय 10.78: दन्तवक्र, विदूरथ तथा रोमहर्षण का वध   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 78: दन्तवक्र, विदूरथ तथा रोमहर्षण का वध  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  10.78.33 
श्रीभगवानुवाच
चरिष्ये वधनिर्वेशं लोकानुग्रहकाम्यया ।
नियम: प्रथमे कल्पे यावान् स तु विधीयताम् ॥ ३३ ॥
 
 
अनुवाद
ईश्वर ने कहा: मैं इस हत्या के प्रायश्चित अवश्य करूँगा क्योंकि मैं साधारण मनुष्यों पर दया दिखाना चाहता हूँ। इसलिए कृपया मुझे बताएँ कि पहले किस अनुष्ठान को करना चाहिए।
 
The Lord said: I will definitely do penance for this murder because I want to show compassion towards the common people. So please decide the first ritual that I have to perform.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)