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सोऽर्चित: सपरीवार: कृतासनपरिग्रह: ।
रोमहर्षणमासीनं महर्षे: शिष्यमैक्षत ॥ २२ ॥
अनुवाद
अपनी टोली के साथ इस प्रकार पूजा अर्चना कराए जाने के बाद भगवान ने सम्मान में एक सीट ग्रहण की। तभी उन्होंने देखा कि व्यासदेव के शिष्य रोमहर्षण बैठे हुए थे।
Having been worshipped in this manner along with his group, the Lord took his seat of respect. Then he saw that Vyasa's disciple Romaharshana was still sitting.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥