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bhagavat 10.78.19-20: भगवान बलराम ने विस्तृत बिन्दु-सरस झील, त्रितकूप, सुदर्शन, विशाल, ब्रह्म-तीर्थ, चक्र-तीर्थ और पूर्व की ओर बहने वाली सरस्वती को देखा। हे भारत, वे यमुना और गंगा नदियों के किनारे के सभी तीर्थस्थलों में गए और फिर वे नैमिष वन आए, जहाँ महान ऋषि एक विस्तृत यज्ञ कर रहे थे।   |   bhagavat अध्याय 10.78: दन्तवक्र, विदूरथ तथा रोमहर्षण का वध   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 78: दन्तवक्र, विदूरथ तथा रोमहर्षण का वध  »  श्लोक 19-20
 
 
श्लोक  10.78.19-20 
पृथूदकं बिन्दुसरस्‍त्रितकूपं सुदर्शनम् ।
विशालं ब्रह्मतीर्थं च चक्रं प्राचीं सरस्वतीम् ॥ १९ ॥
यमुनामनु यान्येव गङ्गामनु च भारत ।
जगाम नैमिषं यत्र ऋषय: सत्रमासते ॥ २० ॥
 
 
अनुवाद
भगवान बलराम ने विस्तृत बिन्दु-सरस झील, त्रितकूप, सुदर्शन, विशाल, ब्रह्म-तीर्थ, चक्र-तीर्थ और पूर्व की ओर बहने वाली सरस्वती को देखा। हे भारत, वे यमुना और गंगा नदियों के किनारे के सभी तीर्थस्थलों में गए और फिर वे नैमिष वन आए, जहाँ महान ऋषि एक विस्तृत यज्ञ कर रहे थे।
 
Lord Balram saw the wide Bindu-Saras Sarovar, Tritkup, Sudarshan, Vishal, Brahmatirtha, Chakratirtha and Purvavahini Saraswati. O Bharata, he visited all the places of pilgrimage on the banks of rivers Yamuna and Ganga and then he came to Naimisharanya, where the sages were performing a great yagya (satra).
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)