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bhagavat 10.78.13-15: श्री कृष्ण ने शाल्व और उसके सौभ विमान और साथ ही दंतवक्र और उसके छोटे भाई का विनाश किया, जो सभी अन्य विरोधियों के समक्ष अजेय थे। इस तरह देवताओं, मनुष्यों, ऋषियों, सिद्धों, गंधर्वों, विद्याधरों, महोरगों के अतिरिक्त अप्सराओं, पितरों, यक्षों, किन्नरों और चारणों ने भगवान की प्रशंसा की। जब ये सभी उनका महिमा-गान कर रहे थे और उन पर फूल बरसा रहे थे, तो भगवान प्रमुख वृष्णियों के साथ अपनी उत्सवपूर्वक सजाई गई राजधानी में प्रवेश कर गए।   |   bhagavat अध्याय 10.78: दन्तवक्र, विदूरथ तथा रोमहर्षण का वध   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 78: दन्तवक्र, विदूरथ तथा रोमहर्षण का वध  »  श्लोक 13-15
 
 
श्लोक  10.78.13-15 
एवं सौभं च शाल्वं च दन्तवक्रं सहानुजम् ।
हत्वा दुर्विषहानन्यैरीडित: सुरमानवै: ॥ १३ ॥
मुनिभि: सिद्धगन्धर्वैर्विद्याधरमहोरगै: ।
अप्सरोभि: पितृगणैर्यक्षै: किन्नरचारणै: ॥ १४ ॥
उपगीयमानविजय: कुसुमैरभिवर्षित: ।
वृतश्च वृष्णिप्रवरैर्विवेशालङ्कृतां पुरीम् ॥ १५ ॥
 
 
अनुवाद
श्री कृष्ण ने शाल्व और उसके सौभ विमान और साथ ही दंतवक्र और उसके छोटे भाई का विनाश किया, जो सभी अन्य विरोधियों के समक्ष अजेय थे। इस तरह देवताओं, मनुष्यों, ऋषियों, सिद्धों, गंधर्वों, विद्याधरों, महोरगों के अतिरिक्त अप्सराओं, पितरों, यक्षों, किन्नरों और चारणों ने भगवान की प्रशंसा की। जब ये सभी उनका महिमा-गान कर रहे थे और उन पर फूल बरसा रहे थे, तो भगवान प्रमुख वृष्णियों के साथ अपनी उत्सवपूर्वक सजाई गई राजधानी में प्रवेश कर गए।
 
Having thus destroyed Śālva and his Saubha-yāna, as well as Dāntāvakra and his younger brother, all of whom were invincible against any other opponent, the demigods, human beings, sages, siddhas, gandharvas, vidyādharas, mahoragas, as well as apsaras, pitris, yakṣas, kinnaras and carānas praised the Lord. While all of them were singing His praises and showering flowers upon Him, the Lord, accompanied by the distinguished Vṛṣṇīs, entered His festively decorated capital.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)