Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 10.77.6-7: धर्मराज युधिष्ठिर के निमंत्रण पर भगवान कृष्ण इन्द्रप्रस्थ गये थे। अब राजसूय यज्ञ पूरा हो चुका था और शिशुपाल का वध हो चुका था। इसी बीच भगवान कृष्ण को कुछ अपशकुन दिखाई देने लगे। इसलिए उन्होंने कुरुवंशी बुजुर्गों, महान ऋषियों और पृथा और उनके पुत्रों से विदा ली और द्वारका लौट आये। | bhagavat अध्याय 10.77: कृष्ण द्वारा शाल्व का वध । bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इन्द्रप्रस्थं गत: कृष्ण आहूतो धर्मसूनुना ।
राजसूयेऽथ निवृत्ते शिशुपाले च संस्थिते ॥ ६ ॥
कुरुवृद्धाननुज्ञाप्य मुनींश्च ससुतां पृथाम् ।
निमित्तान्यतिघोराणि पश्यन् द्वारवतीं ययौ ॥ ७ ॥
अनुवाद
धर्मराज युधिष्ठिर के निमंत्रण पर भगवान कृष्ण इन्द्रप्रस्थ गये थे। अब राजसूय यज्ञ पूरा हो चुका था और शिशुपाल का वध हो चुका था। इसी बीच भगवान कृष्ण को कुछ अपशकुन दिखाई देने लगे। इसलिए उन्होंने कुरुवंशी बुजुर्गों, महान ऋषियों और पृथा और उनके पुत्रों से विदा ली और द्वारका लौट आये।
Lord Krishna had gone to Indraprastha after being invited by Dharmaputra Yudhishthira. Now that the Rajasuya sacrifice had been completed and Sisupala had been killed, the Lord began to see bad omens. So He took leave of the Kuru clan elders and great sages and also of His aunt Pritha and her sons and returned to Dwaraka.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥