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bhagavat 10.77.24: [भगवान कृष्ण ने कहा] : “बलराम हमेशा चौकन्ने रहते हैं और कोई देवता या दानव उन्हें हरा नहीं सकता। तो यह महत्वहीन साल्व कैसे उन्हें हरा सकता है और मेरे पिता का अपहरण कर सकता है? निःसंदेह, भाग्य सबसे शक्तिशाली है!”   |   bhagavat अध्याय 10.77: कृष्ण द्वारा शाल्व का वध   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 77: कृष्ण द्वारा शाल्व का वध  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  10.77.24 
कथं राममसम्भ्रान्तं जित्वाजेयं सुरासुरै: ।
शाल्वेनाल्पीयसा नीत: पिता मे बलवान् विधि: ॥ २४ ॥
 
 
अनुवाद
[भगवान कृष्ण ने कहा] : “बलराम हमेशा चौकन्ने रहते हैं और कोई देवता या दानव उन्हें हरा नहीं सकता। तो यह महत्वहीन साल्व कैसे उन्हें हरा सकता है और मेरे पिता का अपहरण कर सकता है? निःसंदेह, भाग्य सबसे शक्तिशाली है!”
 
[Lord Krishna said]: “Balarama is ever vigilant and no devata or asura can defeat him. So how can this petty Śālva defeat him and abduct my father? Indeed, fate is all-powerful.”
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)