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bhagavat 10.77.17-18: [शाल्व ने कहा :] हे मूर्ख! चूँकि हमारी उपस्थिति में ही तुमने हमारे मित्र और अपने ही भाई शिशुपाल की मंगेलर का अपहरण कर लिया था और बाद में जब वह लापरवाह था तब पवित्र सभा में ही तुमने उसकी हत्या कर दी थी, इसलिए आज मैं तुम्हें अपने तीखे बाणों से ऐसे लोक में भेज दूँगा जहाँ से वापसी नहीं होती। हालाँकि तुम अपने आपको अपराजेय मानते हो, लेकिन यदि तुम मेरे सामने खड़े होने का साहस करोगे तो मैं तुम्हें अभी मार डालूँगा।   |   bhagavat अध्याय 10.77: कृष्ण द्वारा शाल्व का वध   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 77: कृष्ण द्वारा शाल्व का वध  »  श्लोक 17-18
 
 
श्लोक  10.77.17-18 
यत्त्वया मूढ न: सख्युर्भ्रातुर्भार्या हृतेक्षताम् ।
प्रमत्त: स सभामध्ये त्वया व्यापादित: सखा ॥ १७ ॥
तं त्वाद्य निशितैर्बाणैरपराजितमानिनम् ।
नयाम्यपुनरावृत्तिं यदि तिष्ठेर्ममाग्रत: ॥ १८ ॥
 
 
अनुवाद
[शाल्व ने कहा :] हे मूर्ख! चूँकि हमारी उपस्थिति में ही तुमने हमारे मित्र और अपने ही भाई शिशुपाल की मंगेलर का अपहरण कर लिया था और बाद में जब वह लापरवाह था तब पवित्र सभा में ही तुमने उसकी हत्या कर दी थी, इसलिए आज मैं तुम्हें अपने तीखे बाणों से ऐसे लोक में भेज दूँगा जहाँ से वापसी नहीं होती। हालाँकि तुम अपने आपको अपराजेय मानते हो, लेकिन यदि तुम मेरे सामने खड़े होने का साहस करोगे तो मैं तुम्हें अभी मार डालूँगा।
 
[Shalva said] : O fool! Since in our presence you have kidnapped the mangeler of our friend and your own brother Sisupala, and thereafter killed him in the sacred assembly when he was not alert, today I will send you with my sharp arrows to a world from which there is no return. Although you think yourself invincible, yet if you dare to stand before me, I will kill you right now.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)