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bhagavat 10.77.11: उपरोक्त आदेश दिए जाने के बाद दारुक ने भगवान के रथ की लगाम थामी और रथ को आगे बढ़ाया। रथ के युद्धभूमि में पहुँचते ही शत्रु और मित्र सभी के द्वारा उस पर लगे गरुड़ के निशान को देखा गया।   |   bhagavat अध्याय 10.77: कृष्ण द्वारा शाल्व का वध   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 77: कृष्ण द्वारा शाल्व का वध  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  10.77.11 
इत्युक्तश्चोदयामास रथमास्थाय दारुक: ।
विशन्तं दद‍ृशु: सर्वे स्वे परे चारुणानुजम् ॥ ११ ॥
 
 
अनुवाद
उपरोक्त आदेश दिए जाने के बाद दारुक ने भगवान के रथ की लगाम थामी और रथ को आगे बढ़ाया। रथ के युद्धभूमि में पहुँचते ही शत्रु और मित्र सभी के द्वारा उस पर लगे गरुड़ के निशान को देखा गया।
 
Having been thus ordered, Daruk took the reins of the Lord's chariot and drove it forward. As soon as the chariot entered the battlefield, everyone present there, both enemies and friends, looked at the symbol of Garuda.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)