श्रीशुक उवाच
स उपस्पृश्य सलिलं दंशितो धृतकार्मुक: ।
नय मां द्युमत: पार्श्वं वीरस्येत्याह सारथिम् ॥ १ ॥
अनुवाद
श्री शुकदेव गोस्वामी ने कहा: पानी से सिंचित होने के बाद, अपना कवच पहन कर तथा अपना धनुष उठा कर भगवान् प्रद्युम्न ने अपने सारथी से कहा, “मुझे उस स्थान पर वापस ले चल जहाँ वीर द्युमान् खड़ा है।”
Sukadeva Gosvami said: After refreshing Himself with water, putting on His armor and taking His bow, Lord Pradyumna said to His charioteer, “Take Me back to where the heroic Dyumana is standing.”
तात्पर्य
प्रद्युम्न युद्ध-भूमि छोड़ कर लौट आने पर उत्सुक हो रहे थे, जब उनका सारथी उन्हें बेहोशी की अवस्था में उठाकर ले गया|
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥