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श्लोक 10.76.5  |
संवत्सरान्ते भगवानाशुतोष उमापति: ।
वरेणच्छन्दयामास शाल्वं शरणमागतम् ॥ ५ ॥ |
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| अनुवाद |
| भगवान उमापति भले ही आशुतोष कहलाते हैं, लेकिन उन्होंने अपनी शरण में आये शाल्व को एक साल तक प्रतीक्षा करवाई और फिर वरदान माँगने को कहा। |
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| भगवान उमापति भले ही आशुतोष कहलाते हैं, लेकिन उन्होंने अपनी शरण में आये शाल्व को एक साल तक प्रतीक्षा करवाई और फिर वरदान माँगने को कहा। |
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