संवत्सरान्ते भगवानाशुतोष उमापति: ।
वरेणच्छन्दयामास शाल्वं शरणमागतम् ॥ ५ ॥
अनुवाद
भगवान उमापति भले ही आशुतोष कहलाते हैं, लेकिन उन्होंने अपनी शरण में आये शाल्व को एक साल तक प्रतीक्षा करवाई और फिर वरदान माँगने को कहा।
Lord Umapati is known as Ashutosh, who gets pleased easily. Yet, he pleased Shalva, who came to him for refuge, only after one year by saying that he can ask for any boon he wishes for.
तात्पर्य
शाल्व भगवान शिव, जो आशुतोष के रूप में विख्यात 'जो जल्दी प्रसन्न होते हैं' की पूजा की। और फिर भी भगवान शिव एक पूरे साल शाल्व के पास नहीं आए, क्योंकि, भगवान होने के नाते, एक महान सर्वज्ञ व्यक्तित्व, उन्होंने समझा कि भगवान कृष्ण के दुश्मन को दिया गया कोई भी आशीर्वाद निरर्थक होगा। फिर भी, शरणम् आगतम् शब्दों द्वारा बताए गए अनुसार, शाल्व भगवान शिव की शरण में आया था, और इस प्रकार उस मानक सिद्धांत को बनाए रखने के लिए कि एक उपासक को आशीर्वाद मिलता है, भगवान शिव ने शाल्व को एक वर प्रदान किया।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥