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bhagavat 10.75.4-7: भीम रसोई-व्यवस्था और दुर्योधन खज़ाने की देख-रेख कर रहे थे तो सहदेव आने वाले मेहमानों का स्वागत कर रहे थे। नकुल आवश्यक सामानों का इंतज़ाम कर रहे थे, अर्जुन बड़ों की सेवा कर रहे थे, कृष्ण सबके पैर धो रहे थे, द्रौपदी भोजन परोस रही थीं और दानवीर कर्ण उपहार दे रहे थे। युयुधान, विकर्ण, हार्दिक्य, विदुर, भूरिश्रवा और बाह्लीक के अन्य पुत्र और सन्तर्दन ऐसे ही कई लोगों ने भी विशाल यज्ञ में स्वेच्छा से कई काम किए। हे राजाओं में श्रेष्ठ, उन्होंने महाराज युधिष्ठिर को खुश करने के लिए ऐसा किया।   |   bhagavat अध्याय 10.75: दुर्योधन का मानमर्दन   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 75: दुर्योधन का मानमर्दन  »  श्लोक 4-7
 
 
श्लोक  10.75.4-7 
भीमो महानसाध्यक्षो धनाध्यक्ष: सुयोधन: ।
सहदेवस्तु पूजायां नकुलो द्रव्यसाधने ॥ ४ ॥
गुरुशुश्रूषणे जिष्णु: कृष्ण: पादावनेजने ।
परिवेषणे द्रुपदजा कर्णो दाने महामना: ॥ ५ ॥
युयुधानो विकर्णश्च हार्दिक्यो विदुरादय: ।
बाह्लीकपुत्रा भूर्याद्या ये च सन्तर्दनादय: ॥ ६ ॥
निरूपिता महायज्ञे नानाकर्मसु ते तदा ।
प्रवर्तन्ते स्म राजेन्द्र राज्ञ: प्रियचिकीर्षव: ॥ ७ ॥
 
 
अनुवाद
भीम रसोई-व्यवस्था और दुर्योधन खज़ाने की देख-रेख कर रहे थे तो सहदेव आने वाले मेहमानों का स्वागत कर रहे थे। नकुल आवश्यक सामानों का इंतज़ाम कर रहे थे, अर्जुन बड़ों की सेवा कर रहे थे, कृष्ण सबके पैर धो रहे थे, द्रौपदी भोजन परोस रही थीं और दानवीर कर्ण उपहार दे रहे थे। युयुधान, विकर्ण, हार्दिक्य, विदुर, भूरिश्रवा और बाह्लीक के अन्य पुत्र और सन्तर्दन ऐसे ही कई लोगों ने भी विशाल यज्ञ में स्वेच्छा से कई काम किए। हे राजाओं में श्रेष्ठ, उन्होंने महाराज युधिष्ठिर को खुश करने के लिए ऐसा किया।
 
Bhima was looking after the kitchen, Duryodhana was looking after the treasury and Sahadeva was engaged in welcoming the guests. Nakula was gathering all the materials, Arjuna was engaged in serving the elders while Krishna was washing the feet of everyone. Draupadi was serving the food and the generous Karna was giving gifts. Many others, such as Yuyudhan, Vikarna, Hardikya, Vidura, Bhurishrava and the other sons and progeny of Bahlika, were also voluntarily engaged in various activities in that great sacrifice. O best of kings, they did so only out of their eagerness to please Maharaja Yudhishthira.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)