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bhagavat 10.75.29: हे परीक्षित, साम्ब और अन्य यदु वीरों को पहले द्वारका वापस भेजने के बाद प्रभु कुछ देर तक राजा को प्रसन्न करने के लिए वहाँ रहे।   |   bhagavat अध्याय 10.75: दुर्योधन का मानमर्दन   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 75: दुर्योधन का मानमर्दन  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  10.75.29 
भगवानपि तत्राङ्ग न्यावात्सीत्तत्प्रियंकर: ।
प्रस्थाप्य यदुवीरांश्च साम्बादींश्च कुशस्थलीम् ॥ २९ ॥
 
 
अनुवाद
हे परीक्षित, साम्ब और अन्य यदु वीरों को पहले द्वारका वापस भेजने के बाद प्रभु कुछ देर तक राजा को प्रसन्न करने के लिए वहाँ रहे।
 
O Parikshit, having sent Samba and the other brave Yadu warriors back to Dvaraka, the Lord stayed there for some time to please the king.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)