Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 10.75.25-26: तत्पश्चात् हे राजन्, अत्यंत सुसंस्कृत पुरोहित, महान वैदिक ज्ञाता, जिन्हें यज्ञ के साक्षी के रूप में आमंत्रित किया गया था, विशेष रूप से आमंत्रित राजगण, ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र, देवगण, ऋषि, पूर्वज, रहस्यमय आत्माएं, प्रमुख ग्रहों के शासकगण और उनके अनुयायी गण - ये सभी राजा युधिष्ठिर द्वारा पूजे जाने के पश्चात् उनसे अनुमति लेकर अपने-अपने निवास के लिए प्रस्थान कर गए। | bhagavat अध्याय 10.75: दुर्योधन का मानमर्दन । bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अथर्त्विजो महाशीला: सदस्या ब्रह्मवादिन: ।
ब्रह्मक्षत्रियविट्शूद्रा राजानो ये समागता: ॥ २५ ॥
देवर्षिपितृभूतानि लोकपाला: सहानुगा: ।
पूजितास्तमनुज्ञाप्य स्वधामानि ययुर्नृप ॥ २६ ॥
अनुवाद
तत्पश्चात् हे राजन्, अत्यंत सुसंस्कृत पुरोहित, महान वैदिक ज्ञाता, जिन्हें यज्ञ के साक्षी के रूप में आमंत्रित किया गया था, विशेष रूप से आमंत्रित राजगण, ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, शूद्र, देवगण, ऋषि, पूर्वज, रहस्यमय आत्माएं, प्रमुख ग्रहों के शासकगण और उनके अनुयायी गण - ये सभी राजा युधिष्ठिर द्वारा पूजे जाने के पश्चात् उनसे अनुमति लेकर अपने-अपने निवास के लिए प्रस्थान कर गए।
Thereafter, O King, the most cultured priests, the great Vedic experts who had served as witnesses to the sacrifice, the specially invited kings, the Brahmanas, Kshatriyas, Vaishyas, Sudras, demigods, sages, Pitris, ghosts and spirits, the chief protectors of the world and their followers, after having worshipped King Yudhishthira, took his permission and departed for their homes.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥