श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 74: राजसूय यज्ञ में शिशुपाल का उद्धार  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  10.74.26 
श्रुत्वा द्विजेरितं राजा ज्ञात्वा हार्दं सभासदाम् ।
समर्हयद्‍धृषीकेशं प्रीत: प्रणयविह्वल: ॥ २६ ॥
 
 
अनुवाद
राजा ब्राह्मणों की इस घोषणा से बेहद खुश हुए क्योंकि वे इससे पूरी सभा की मनोदशा समझ गये थे। उन्होंने प्यार से भरकर इन्द्रियों के स्वामी भगवान कृष्ण की पूजा की।
 
The king was very pleased with this announcement of the brahmanas as he understood the mood of the entire assembly. Overwhelmed with love, he worshipped Lord Krishna, the master of the senses.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)