श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 74: राजसूय यज्ञ में शिशुपाल का उद्धार  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  10.74.22 
विविधानीह कर्माणि जनयन् यदवेक्षया ।
ईहते यदयं सर्व: श्रेयो धर्मादिलक्षणम् ॥ २२ ॥
 
 
अनुवाद
वह इस जगत में विविध कर्मों की उत्पत्ति करते हैं। उनकी ही कृपा से सारा संसार धर्म, अर्थ, काम तथा मोक्ष की प्राप्ति के लिए प्रयत्नशील रहता है।
 
He creates various actions in this world and thus by His grace the whole universe strives for the ideals of Dharma, Artha, Kama and Moksha.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)