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bhagavat 10.74.10-11: हे राजन्, उत्सुकता से यज्ञ देखने के लिए द्रोण, भीष्म, कृप, धृतराष्ट्र और उनके पुत्र, बुद्धिमान विदुर और अन्य ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र आमंत्रित थे। वास्तव में, सभी राजा अपने अनुचरों के साथ वहाँ आए थे।   |   bhagavat अध्याय 10.74: राजसूय यज्ञ में शिशुपाल का उद्धार   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 74: राजसूय यज्ञ में शिशुपाल का उद्धार  »  श्लोक 10-11
 
 
श्लोक  10.74.10-11 
उपहूतास्तथा चान्ये द्रोणभीष्मकृपादय: ।
धृतराष्ट्र: सहसुतो विदुरश्च महामति: ॥ १० ॥
ब्राह्मणा: क्षत्रिया वैश्या: शूद्रा यज्ञदिद‍ृक्षव: ।
तत्रेयु: सर्वराजानो राज्ञां प्रकृतयो नृप ॥ ११ ॥
 
 
अनुवाद
हे राजन्, उत्सुकता से यज्ञ देखने के लिए द्रोण, भीष्म, कृप, धृतराष्ट्र और उनके पुत्र, बुद्धिमान विदुर और अन्य ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र आमंत्रित थे। वास्तव में, सभी राजा अपने अनुचरों के साथ वहाँ आए थे।
 
O King, the others who were invited included Drona, Bhishma, Kripa, Dhritarashtra with his sons, the wise Vidura and other Brahmins, Kshatriyas, Vaishyas and Shudras who were eager to see the sacrifice. Yes, all the kings had come there with their armies.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)