श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 73: बन्दी-गृह से छुड़ाये गये राजाओं को कृष्ण द्वारा आशीर्वाद  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  10.73.32 
गत्वा ते खाण्डवप्रस्थं शङ्खान् दध्मुर्जितारय: ।
हर्षयन्त: स्वसुहृदो दुर्हृदां चासुखावहा: ॥ ३२ ॥
 
 
अनुवाद
जब वे इंद्रप्रस्थ पंहुँचे, तो विजयी वीरों ने अपने शंख बजाए। इससे उनके शुभचिंतक मित्र खुशी से झूम उठे, जबकि उनके शत्रुओं को गहरा दुख हुआ।
 
जब वे इंद्रप्रस्थ पंहुँचे, तो विजयी वीरों ने अपने शंख बजाए। इससे उनके शुभचिंतक मित्र खुशी से झूम उठे, जबकि उनके शत्रुओं को गहरा दुख हुआ।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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