श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 73: बन्दी-गृह से छुड़ाये गये राजाओं को कृष्ण द्वारा आशीर्वाद  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  10.73.15 
तं न: समादिशोपायं येन ते चरणाब्जयो: ।
स्मृतिर्यथा न विरमेदपि संसरतामिह ॥ १५ ॥
 
 
अनुवाद
कृपया हमें यह बताएं कि किस प्रकार हम आपके चरणकमलों का सदा स्मरण कर सकते हैं, जबकि हम इस दुनिया में जन्म-मृत्यु के चक्र में फंसे हुए हैं।
 
कृपया हमें यह बताएं कि किस प्रकार हम आपके चरणकमलों का सदा स्मरण कर सकते हैं, जबकि हम इस दुनिया में जन्म-मृत्यु के चक्र में फंसे हुए हैं।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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