श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 72: जरासन्ध असुर का वध  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  10.72.8 
ऋषीणां पितृदेवानां सुहृदामपि न: प्रभो ।
सर्वेषामपि भूतानामीप्सित: क्रतुराडयम् ॥ ८ ॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु, निस्सन्देह महाऋषियों, पितृओं और देवताओं के लिए, हमारे शुभचिन्तक मित्रों के लिए तथा वास्तव में समस्त प्राणियों के लिए इस विशिष्ट वैदिक कर्म का संपन्न होना अभीष्ट है।
 
O Lord, undoubtedly the performance of this king of Vedic sacrifices is desirable for the Maharishis, Pitris and Devtas, for our well-wishing friends and indeed for all living entities.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)