श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 72: जरासन्ध असुर का वध  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  10.72.33 
इत्युक्त्वा भीमसेनाय प्रादाय महतीं गदाम् ।
द्वितीयां स्वयमादाय निर्जगाम पुराद् बहि: ॥ ३३ ॥
 
 
अनुवाद
ऐसा कहकर जरासंध ने भीमसेन को एक बड़ी गदा दे दी, दूसरी गदा स्वयं ने ली और नगर के बाहर चले गए।
 
Saying this, Jarasandha gave a big mace to Bhimasena, took the other mace himself and went out of the city.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)