राजन् विद्ध्यतिथीन् प्राप्तानर्थिनो दूरमागतान् ।
तन्न: प्रयच्छ भद्रं ते यद्वयं कामयामहे ॥ १८ ॥
अनुवाद
[कृष्ण, अर्जुन और भीम ने कहा] हे राजा, हमें दीन-दुखी अतिथि के रूप में जानें, जो बहुत दूर से आपके पास आए हैं। हम आपका कल्याण चाहते हैं। हम जो भी चाहें, कृपया हमें दें।
[Krishna, Arjuna and Bhima said] O King, please consider us as humble guests who have come to you from a far off place. We seek your welfare. Please give us whatever we desire.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥