श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 72: जरासन्ध असुर का वध  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  10.72.15 
श्रुत्वाजितं जरासन्धं नृपतेर्ध्यायतो हरि: ।
आहोपायं तमेवाद्य उद्धवो यमुवाच ह ॥ १५ ॥
 
 
अनुवाद
जब राजा युधिष्ठिर को पता चला कि जरासंध को हराया नहीं जा सका है, तब वह चिंतित हो गए। तब सर्वप्रथम भगवान हरि ने युधिष्ठिर को वह उपाय बताया, जिसे उद्धव ने जरासंध को हराने के लिए उन्हें सुनाया था।
 
When King Yudhishthira heard that Jarasandha could not be defeated, he became very deep in thought and then the Supreme Lord Hari told him the solution that Uddhava had told him to defeat Jarasandha.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)