श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 71: भगवान् की इन्द्रप्रस्थ यात्रा  »  श्लोक 43
 
 
श्लोक  10.71.43 
सुखं निवासयामास धर्मराजो जनार्दनम् ।
ससैन्यं सानुगामत्यं सभार्यं च नवं नवम् ॥ ४३ ॥
 
 
अनुवाद
राज्य युधिष्ठिर ने श्री कृष्ण के विश्राम की व्यवस्था की और सुनिश्चित किया कि उनके साथ आये सभी लोगों—जैसे कि उनकी रानियाँ, सैनिक, मंत्री और सचिव—को आरामदायक ठिकाना मिले। उन्होंने ऐसा प्रबंध किया कि जब तक वे पाण्डवों के मेहमान रहेंगे, हर दिन उनका स्वागत नई तरह से हो।
 
राज्य युधिष्ठिर ने श्री कृष्ण के विश्राम की व्यवस्था की और सुनिश्चित किया कि उनके साथ आये सभी लोगों—जैसे कि उनकी रानियाँ, सैनिक, मंत्री और सचिव—को आरामदायक ठिकाना मिले। उन्होंने ऐसा प्रबंध किया कि जब तक वे पाण्डवों के मेहमान रहेंगे, हर दिन उनका स्वागत नई तरह से हो।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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