| श्रीमद् भागवतम » स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ » अध्याय 71: भगवान् की इन्द्रप्रस्थ यात्रा » श्लोक 4 |
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| | | | श्लोक 10.71.4  | अस्माकं च महानर्थो ह्येतेनैव भविष्यति ।
यशश्च तव गोविन्द राज्ञो बद्धान् विमुञ्चत: ॥ ४ ॥ | | | | | | अनुवाद | | इस निश्चय से हमे बहुत लाभ होगा और आप राजाओं का उद्धार कर सकेंगे। इस तरह, हे गोविन्द, आपकी कीर्ति बढ़ेगी। | | | | इस निश्चय से हमे बहुत लाभ होगा और आप राजाओं का उद्धार कर सकेंगे। इस तरह, हे गोविन्द, आपकी कीर्ति बढ़ेगी। | | ✨ ai-generated | | |
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