श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 71: भगवान् की इन्द्रप्रस्थ यात्रा  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  10.71.34 
तस्मिन् सुसङ्कुल इभाश्वरथद्विपद्भ‍ि:
कृष्णं सभार्यमुपलभ्य गृहाधिरूढा: ।
नार्यो विकीर्य कुसुमैर्मनसोपगुह्य
सुस्वागतं विदधुरुत्स्मयवीक्षितेन ॥ ३४ ॥
 
 
अनुवाद
राजमार्ग पर हाथी, घोड़े, रथ और पैदल सैनिकों की भारी भीड़ थी। इसलिए, महिलाएँ अपने घरों की छतों पर चढ़ गईं। वहाँ से उन्होंने भगवान कृष्ण और उनकी रानियों को देखा। शहर की महिलाओं ने भगवान पर फूल बरसाए, मन ही मन उन्हें गले लगाया और मुस्कुराते हुए अपनी हार्दिक खुशी जाहिर की।
 
राजमार्ग पर हाथी, घोड़े, रथ और पैदल सैनिकों की भारी भीड़ थी। इसलिए, महिलाएँ अपने घरों की छतों पर चढ़ गईं। वहाँ से उन्होंने भगवान कृष्ण और उनकी रानियों को देखा। शहर की महिलाओं ने भगवान पर फूल बरसाए, मन ही मन उन्हें गले लगाया और मुस्कुराते हुए अपनी हार्दिक खुशी जाहिर की।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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