श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 71: भगवान् की इन्द्रप्रस्थ यात्रा  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  10.71.30 
एवं सुहृद्भ‍ि: पर्यस्त: पुण्यश्लोकशिखामणि: ।
संस्तूयमानो भगवान् विवेशालङ्कृतं पुरम् ॥ ३० ॥
 
 
अनुवाद
इस तरह, अपने प्रियजनों से घिरे हुए और हर तरफ से प्रशंसा पाते हुए, प्रसिद्धों में श्रेष्ठ भगवान कृष्ण सजे-धजे नगर में प्रवेश कर गए।
 
Thus, surrounded by his well-wishing relatives and being praised from all sides, Lord Krishna, the jewel of all the illustrious, entered the decorated city.
तात्पर्य
श्रील प्रभुपाद लिखते हैं, ''जैसे ही भगवान कृष्ण शहर में प्रवेश कर रहे थे सभी लोग एक दूसरे से प्रभु की महिमाओं के बारे में बातें कर रहे थे, उनके दिव्य नाम, गुण, रूप आदि की स्तुति कर रहे थे।''
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)