श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 71: भगवान् की इन्द्रप्रस्थ यात्रा  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  10.71.29 
सूतमागधगन्धर्वा वन्दिनश्चोपमन्त्रिण: ।
मृदङ्गशङ्खपटहवीणापणवगोमुखै: ।
ब्राह्मणाश्चारविन्दाक्षं तुष्टुवुर्ननृतुर्जगु: ॥ २९ ॥
 
 
अनुवाद
सूतों, मागधों, गंधर्वों, वन्दीजनों, विदूषकों और ब्राह्मणों में से कुछ ने स्तुति-प्रार्थना करके, कुछ ने नाच-गाकर कमल-नेत्र भगवान् का यशोगान किया। इसी बीच मृदंग, शंख, दुंदुभी, वीणा, पणव और गोमुख गूंजने लगे।
 
सूतों, मागधों, गंधर्वों, वन्दीजनों, विदूषकों और ब्राह्मणों में से कुछ ने स्तुति-प्रार्थना करके, कुछ ने नाच-गाकर कमल-नेत्र भगवान् का यशोगान किया। इसी बीच मृदंग, शंख, दुंदुभी, वीणा, पणव और गोमुख गूंजने लगे।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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