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श्लोक 10.71.24  |
गीतवादित्रघोषेण ब्रह्मघोषेण भूयसा ।
अभ्ययात्स हृषीकेशं प्राणा: प्राणमिवादृत: ॥ २४ ॥ |
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| अनुवाद |
| वैदिक स्तुतियों की ऊँची ध्वनि के साथ-साथ गीत तथा संगीत-वाद्य बज उठे और राजा बहुत अधिक सम्मान के साथ भगवान् हृषीकेश से मिलने के लिए आगे बढ़े, ठीक उसी तरह जैसे इन्द्रियाँ प्राणों से मिलने के लिए जाती हैं। |
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| वैदिक स्तुतियों की ऊँची ध्वनि के साथ-साथ गीत तथा संगीत-वाद्य बज उठे और राजा बहुत अधिक सम्मान के साथ भगवान् हृषीकेश से मिलने के लिए आगे बढ़े, ठीक उसी तरह जैसे इन्द्रियाँ प्राणों से मिलने के लिए जाती हैं। |
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