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श्लोक 10.71.20  |
इत्युक्त: प्रस्थितो दूतो यथावदवदन्नृपान् ।
तेऽपि सन्दर्शनं शौरे: प्रत्यैक्षन् यन्मुमुक्षव: ॥ २० ॥ |
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| अनुवाद |
| इस प्रकार संदेश मिलने पर दूत गया और राजाओं के पास जाकर उसने भगवान कृष्ण का संदेश सटीक रूप से सुना दिया। स्वतंत्रता की इच्छा से वे सभी उत्सुकता से भगवान कृष्ण से मिलने के लिए आशाभरी दृष्टि से इंतजार करने लगे। |
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| इस प्रकार संदेश मिलने पर दूत गया और राजाओं के पास जाकर उसने भगवान कृष्ण का संदेश सटीक रूप से सुना दिया। स्वतंत्रता की इच्छा से वे सभी उत्सुकता से भगवान कृष्ण से मिलने के लिए आशाभरी दृष्टि से इंतजार करने लगे। |
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