श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 71: भगवान् की इन्द्रप्रस्थ यात्रा  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  10.71.19 
राजदूतमुवाचेदं भगवान् प्रीणयन् गिरा ।
मा भैष्ट दूत भद्रं वो घातयिष्यामि मागधम् ॥ १९ ॥
 
 
अनुवाद
राजाओं द्वारा भेजे गए दूत को भगवान ने मधुर वाणी में संबोधित किया, "हे दूत, मैं तुम्हारे सुख-समृद्धि की कामना करता हूं। मैं मगध के राजा के वध का प्रबंध करूँगा। तुम निर्भय रहो।"
 
राजाओं द्वारा भेजे गए दूत को भगवान ने मधुर वाणी में संबोधित किया, "हे दूत, मैं तुम्हारे सुख-समृद्धि की कामना करता हूं। मैं मगध के राजा के वध का प्रबंध करूँगा। तुम निर्भय रहो।"
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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