| श्रीमद् भागवतम » स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ » अध्याय 71: भगवान् की इन्द्रप्रस्थ यात्रा » श्लोक 16 |
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| | | | श्लोक 10.71.16  | नरोष्ट्रगोमहिषखराश्वतर्यन:-
करेणुभि: परिजनवारयोषित: ।
स्वलङ्कृता: कटकुटिकम्बलाम्बरा-
द्युपस्करा ययुरधियुज्य सर्वत: ॥ १६ ॥ | | | | | | अनुवाद | | उनके चारों ओर खूब सजी-धजी स्त्रियां—जो कि राजघराने की सेविका और राज-दरबारियों की पत्नियां थीं—चल रही थीं। वे पालकियों और ऊँटों, बैलों, भैंसों, गधों, खच्चरों, बैलगाड़ियों और हाथियों पर सवार थीं। उनके वाहन घास के तंबुओं, कंबलों, वस्त्रों और यात्रा की अन्य सामग्रियों से खचाखच भरे हुए थे। | | | | उनके चारों ओर खूब सजी-धजी स्त्रियां—जो कि राजघराने की सेविका और राज-दरबारियों की पत्नियां थीं—चल रही थीं। वे पालकियों और ऊँटों, बैलों, भैंसों, गधों, खच्चरों, बैलगाड़ियों और हाथियों पर सवार थीं। उनके वाहन घास के तंबुओं, कंबलों, वस्त्रों और यात्रा की अन्य सामग्रियों से खचाखच भरे हुए थे। | | ✨ ai-generated | | |
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