श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 71: भगवान् की इन्द्रप्रस्थ यात्रा  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  10.71.15 
नृवाजिकाञ्चनशिबिकाभिरच्युतं
सहात्मजा: पतिमनु सुव्रता ययु: ।
वराम्बराभरणविलेपनस्रज:
सुसंवृता नृभिरसिचर्मपाणिभि: ॥ १५ ॥
 
 
अनुवाद
प्रभु अच्युत की सती-साध्वी पत्नियाँ अपनी संतानों सहित, सोने की पालकियों में प्रभु के पीछे-पीछे चल रही थीं, जिन्हें बलशाली पुरुष उठाए हुए थे। रानियों ने सुंदर वस्त्र, आभूषण, सुगंधित तेल और फूलों की मालाएँ धारण की हुई थीं और चारों ओर से सैनिक तलवारें और ढालें हाथ में लिए हुए घेरे हुए थे।
 
प्रभु अच्युत की सती-साध्वी पत्नियाँ अपनी संतानों सहित, सोने की पालकियों में प्रभु के पीछे-पीछे चल रही थीं, जिन्हें बलशाली पुरुष उठाए हुए थे। रानियों ने सुंदर वस्त्र, आभूषण, सुगंधित तेल और फूलों की मालाएँ धारण की हुई थीं और चारों ओर से सैनिक तलवारें और ढालें हाथ में लिए हुए घेरे हुए थे।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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