श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 71: भगवान् की इन्द्रप्रस्थ यात्रा  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  10.71.12 
अथादिशत् प्रयाणाय भगवान् देवकीसुत: ।
भृत्यान् दारुकजैत्रादीननुज्ञाप्य गुरून् विभु: ॥ १२ ॥
 
 
अनुवाद
देवकी के पुत्र सर्वव्यापी भगवान् ने अपने बड़ों से विदा होने की इच्छा व्यक्त की। उसके बाद उन्होंने दारुक और जैत्र जैसे सेवकों को प्रस्थान की तैयारी करने को कहा।
 
देवकी के पुत्र सर्वव्यापी भगवान् ने अपने बड़ों से विदा होने की इच्छा व्यक्त की। उसके बाद उन्होंने दारुक और जैत्र जैसे सेवकों को प्रस्थान की तैयारी करने को कहा।
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas