श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 70: भगवान् कृष्ण की दैनिक चर्या  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  10.70.45 
श्रीशुक उवाच
तत्र तेष्वात्मपक्षेष्वगृणत्सु विजिगीषया ।
वाच: पेशै: स्मयन् भृत्यमुद्धवं प्राह केशव: ॥ ४५ ॥
 
 
अनुवाद
शुकदेव गोस्वामी ने कहा: जब जरासंध को हराने की इच्छा रखने वाले भगवान के समर्थक यादवों ने इस प्रस्ताव का विरोध किया, तब भगवान केशव अपने सेवक उद्धव की ओर मुड़े और मुस्कुराते हुए अच्छे शब्दों में उनसे बोले।
 
शुकदेव गोस्वामी ने कहा: जब जरासंध को हराने की इच्छा रखने वाले भगवान के समर्थक यादवों ने इस प्रस्ताव का विरोध किया, तब भगवान केशव अपने सेवक उद्धव की ओर मुड़े और मुस्कुराते हुए अच्छे शब्दों में उनसे बोले।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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