शुकदेव गोस्वामी ने कहा: जब जरासंध को हराने की इच्छा रखने वाले भगवान के समर्थक यादवों ने इस प्रस्ताव का विरोध किया, तब भगवान केशव अपने सेवक उद्धव की ओर मुड़े और मुस्कुराते हुए अच्छे शब्दों में उनसे बोले।
Sukadeva Gosvami said: When the Yadavas, who were on the side of the Lord and desired to defeat Jarasandha, opposed this proposal, Lord Kesava turned to His attendant Uddhava and smilingly spoke to him in excellent words.
तात्पर्य
श्रील प्रभुपाद ने समझाया, “महान ऋषि नारद के द्वारका के सुधर्मा सभा भवन आने से ठीक पहले, भगवान कृष्ण और उनके मंत्रियों तथा सचिवों ने विचार किया था कि जरासंध के राज्य पर कैसे आक्रमण करें। वे इस विषय पर गंभीरता से विचार कर रहे थे, ऐसे में नारद के द्वारा प्रस्ताव कि भगवान कृष्ण महाराज युधिष्ठिर के राजसूय यज्ञ के लिए हस्तिनापुर जाएँ, वह उन्हें ज्यादा अच्छा नहीं लगा। भगवान कृष्ण स्वयं भगवान ब्रह्मा के भी शासक है, इसलिए वह अपने सहयोगियों के विचारों को समझ सकते थे। इसलिए, उन्हें शांत करने के लिए, उन्होंने मुस्कुराते हुए उद्धव से [बोला]।”
श्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती ने बताया कि भगवान इसलिए मुस्कुराए क्योंकि वह कठिन परिस्थितियों में सलाह देने की उद्धव की शानदार योग्यता का प्रदर्शन करने जा रहे थे।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥