हे प्रभु, जब जाति से निकाले गए (अंत्यज) लोग भी आपके यश का श्रवण, कीर्तन तथा ध्यान करके शुद्ध हो जाते हैं तो फिर उनका क्या कहना जो आपको देखते और स्पर्श करते हैं?
O Lord, by listening to and singing praises of you and meditating on you as Brahman, even those who are outcasts become pure. Then what can be said about those who see you and touch you?
तात्पर्य
श्रील श्रीधर स्वामी ने 'ब्रह्म-मायस्य' शब्द की व्याख्या ब्रह्म-घन-मूर्तेः के रूप में की है, जो "पूर्ण परमसत्य के रूप में" है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥