राजा युधिष्ठिर एकछत्र सत्ता की अभिलाषा से राजसूय नामक महान यज्ञ द्वारा आपकी आराधना करना चाहते हैं। उनकी इस इच्छा की पूर्ति के लिए कृपा करके उन्हें अपना आशीर्वाद प्रदान करें।
King Yudhishthira, desirous of absolute power, wishes to worship You by performing the greatest sacrifice called Rajasuya. Kindly bless him in this endeavor.
तात्पर्य
राजा युधिष्ठिर को यहाँ 'पारमेष्ठ्य-काम' या 'पारमेष्ठ्य इच्छुक' के रूप में वर्णित किया गया है। शब्द 'पारमेष्ठ्य', 'अद्वितीय श्रेष्ठता' का अर्थ सूचित करता है और यह 'परमप्रभु या भगवान' को भी इंगित करता है, जो कि सभी अस्तित्वों के सर्वोच्च शिखर पर स्थित हैं। इसलिए, श्रील प्रभुपाद नारद के संदेश का अनुवाद इस प्रकार करते हैं: "आपने अपने चचेरे भाइयों पांडवों के बारे में उनके शुभचिंतक की भूमिका में पूछताछ की है, और इसलिए मैं आपको उनके इरादों के बारे में बताऊंगा। अब कृपया मुझे सुनें। सबसे पहले, क्या मैं आपको सूचित कर सकता हूं कि राजा युधिष्ठिर के पास सभी भौतिक संपन्नताएं हैं जो कि उच्चतम ग्रह प्रणाली, ब्रह्मलोक में प्राप्त करना संभव है। उनके पास प्राप्त करने के लिए कोई भौतिक संपन्नता नहीं है, और फिर भी वह केवल आपकी संगति पाने और आपको प्रसन्न करने के लिए ही राजसूय यज्ञ करना चाहते हैं... वह आपकी अकारण कृपा प्राप्त करने के लिए आपकी पूजा करना चाहते हैं, और मैं आपसे विनम्र निवेदन करता हूँ कि उनकी इच्छाओं को पूरा करें।" चूंकि शब्द 'पारमेष्ठ्य', भगवान ब्रह्मा की स्थिति को भी इंगित कर सकता है, इसलिए 'पारमेष्ठ्य-काम' शब्द को श्रील प्रभुपाद द्वारा यहां यह संकेत देने के लिए लिया गया है कि न केवल राजा युधिष्ठिर भगवान कृष्ण की संगत और कृपा चाहते थे बल्कि स्वयं राजा युधिष्ठिर के पास 'पारमेष्ठ्य' था, जो कि भगवान ब्रह्मा की सभी संपन्नताएं थीं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥