श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 70: भगवान् कृष्ण की दैनिक चर्या  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  10.70.34 
सभाजयित्वा विधिवत् कृतासनपरिग्रहम् ।
बभाषे सुनृतैर्वाक्यै: श्रद्धया तर्पयन् मुनिम् ॥ ३४ ॥
 
 
अनुवाद
जब नारद ने उन्हें दिया गया आसन स्वीकार कर लिया, तब भगवान श्री कृष्ण ने शास्त्रों की विधियों के अनुसार मुनि का स्वागत किया और उन्हें सम्मानपूर्वक संतुष्ट करते हुए निम्नलिखित सत्यनिष्ठ और मधुर वचन बोले।
 
When Narada had taken the seat offered to him, the Lord welcomed the sage according to the scriptural rites and, respectfully appeasing him, spoke the following truthful and sweet words to him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)