श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 70: भगवान् कृष्ण की दैनिक चर्या  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  10.70.31 
दूत उवाच
इति मागधसंरुद्धा भवद्दर्शनकाङ्‍‍क्षिण: ।
प्रपन्ना: पादमूलं ते दीनानां शं विधीयताम् ॥ ३१ ॥
 
 
अनुवाद
दूत ने आगे कहा: यह जरासंध द्वारा बंदी बनाये गये राजाओं का सन्देश है। वे सभी आपके दर्शनों के लिए लालायित हैं, क्योंकि उन्होंने अपने को आपके चरणों में समर्पित कर दिया है। कृपा करके इन बेचारों पर दया करें।
 
दूत ने आगे कहा: यह जरासंध द्वारा बंदी बनाये गये राजाओं का सन्देश है। वे सभी आपके दर्शनों के लिए लालायित हैं, क्योंकि उन्होंने अपने को आपके चरणों में समर्पित कर दिया है। कृपा करके इन बेचारों पर दया करें।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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