श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 70: भगवान् कृष्ण की दैनिक चर्या  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  10.70.3 
मुहूर्तं तं तु वैदर्भी नामृष्यदतिशोभनम् ।
परिरम्भणविश्लेषात् प्रियबाह्वन्तरं गता ॥ ३ ॥
 
 
अनुवाद
अपने प्रियतम की बाँहों में लेटी हुई महारानी वैदर्भी को यह शुभ घड़ी रास नहीं आती थी, क्योंकि इसका अभिप्राय था कि प्रियतम के आलिंगन से उन्हें विलग होना पड़ेगा।
 
अपने प्रियतम की बाँहों में लेटी हुई महारानी वैदर्भी को यह शुभ घड़ी रास नहीं आती थी, क्योंकि इसका अभिप्राय था कि प्रियतम के आलिंगन से उन्हें विलग होना पड़ेगा।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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