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श्लोक 10.70.22  |
तत्रैक: पुरुषो राजन्नागतोऽपूर्वदर्शन: ।
विज्ञापितो भगवते प्रतीहारै: प्रवेशित: ॥ २२ ॥ |
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| अनुवाद |
| हे राजन्, उस सभा में एक व्यक्ति आया था जो इससे पहले वहाँ कभी नहीं देखा गया था। द्वारपालों ने उसके आने का संदेश भगवान् तक पहुँचाया और फिर उसे अंदर ले जाया गया। |
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| हे राजन्, उस सभा में एक व्यक्ति आया था जो इससे पहले वहाँ कभी नहीं देखा गया था। द्वारपालों ने उसके आने का संदेश भगवान् तक पहुँचाया और फिर उसे अंदर ले जाया गया। |
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