श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 70: भगवान् कृष्ण की दैनिक चर्या  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  10.70.2 
वयांस्यरोरुवन्कृष्णं बोधयन्तीव वन्दिन: ।
गायत्स्वलिष्वनिद्राणि मन्दारवनवायुभि: ॥ २ ॥
 
 
अनुवाद
पारिजात उद्यान से बहकर आई सुगंधित वायु के कारण भौंरों की गुनगुनाहट से पक्षी नींद से जाग उठे। और जब ये पक्षी जोर-जोर से चहचहाने लगे तभी उनकी आवाज ने भगवान कृष्ण को जगा दिया, मानो दरबारी कवि उनके गुणों का गुणगान कर रहे हों।
 
पारिजात उद्यान से बहकर आई सुगंधित वायु के कारण भौंरों की गुनगुनाहट से पक्षी नींद से जाग उठे। और जब ये पक्षी जोर-जोर से चहचहाने लगे तभी उनकी आवाज ने भगवान कृष्ण को जगा दिया, मानो दरबारी कवि उनके गुणों का गुणगान कर रहे हों।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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