Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 10.70.12: तब वे घी, दर्पण, गायों तथा बैलों, ब्राह्मणों और देवताओं की ओर देखते थे और आश्वस्त होते थे कि महल और पूरे शहर में रहने वाले सभी समाज वर्गों के लोग इन उपहारों से संतुष्ट हैं। इसके पश्चात, वे अपने मंत्रियों का अभिवादन करते थे और उनकी सभी इच्छाओं को पूरा करके उन्हें प्रसन्न करते थे। | bhagavat अध्याय 10.70: भगवान् कृष्ण की दैनिक चर्या । bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तब वे घी, दर्पण, गायों तथा बैलों, ब्राह्मणों और देवताओं की ओर देखते थे और आश्वस्त होते थे कि महल और पूरे शहर में रहने वाले सभी समाज वर्गों के लोग इन उपहारों से संतुष्ट हैं। इसके पश्चात, वे अपने मंत्रियों का अभिवादन करते थे और उनकी सभी इच्छाओं को पूरा करके उन्हें प्रसन्न करते थे।
Then he would look at the ghee, the mirror, the cows and bulls, the Brahmins and the gods and assure himself that all the people of all castes living inside the palace and in the entire city are satisfied with these gifts. Then he would greet and welcome his ministers after fulfilling their wishes.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥