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श्लोक 10.70.11  |
आत्मानं भूषयामास नरलोकविभूषणम् ।
वासोभिर्भूषणै: स्वीयैर्दिव्यस्रगनुलेपनै: ॥ ११ ॥ |
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| अनुवाद |
| वे मानव समाज के आभूषण स्वरूप अपने शरीर को अपने विशेष वस्त्रों तथा रत्नों से और दिव्य फूलमालाओं एवं चन्दन के लेपों से सजाते। |
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| वे मानव समाज के आभूषण स्वरूप अपने शरीर को अपने विशेष वस्त्रों तथा रत्नों से और दिव्य फूलमालाओं एवं चन्दन के लेपों से सजाते। |
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