श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 70: भगवान् कृष्ण की दैनिक चर्या  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  10.70.1 
श्रीशुक उवाच
अथोषस्युपवृत्तायां कुक्कुटान् कूजतोऽशपन् ।
गृहीतकण्ठ्य: पतिभिर्माधव्यो विरहातुरा: ॥ १ ॥
 
 
अनुवाद
शुकदेव गोस्वामी ने कहा: जैसे-जैसे प्रभात नजदीक आने लगा, भगवान माधव की सभी पत्नियाँ, जो पति के गले में आलिंगित थीं, बाँग देने वाले मुर्गाें को कोसने लगीं। ये स्त्रियाँ व्याकुल थीं क्योंकि अब वे उनसे अलग हो जाएंगी।
 
शुकदेव गोस्वामी ने कहा: जैसे-जैसे प्रभात नजदीक आने लगा, भगवान माधव की सभी पत्नियाँ, जो पति के गले में आलिंगित थीं, बाँग देने वाले मुर्गाें को कोसने लगीं। ये स्त्रियाँ व्याकुल थीं क्योंकि अब वे उनसे अलग हो जाएंगी।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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