श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 7: तृणावर्त का वध  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  10.7.9 
ऊचुरव्यवसितमतीन् गोपान्गोपीश्च बालका: ।
रुदतानेन पादेन क्षिप्तमेतन्न संशय: ॥ ९ ॥
 
 
अनुवाद
वहाँ उपस्थित ग्वाले और गोपियाँ आपस में विचार करने लगे कि यह घटना कैसे हुई? उन्होंने सवाल किया, "कहीं यह किसी राक्षस या अशुभ ग्रह का काम तो नहीं है?" उस समय वहाँ मौजूद छोटे-छोटे बच्चों ने ज़ोर देकर कहा कि बालक कृष्ण ने ही इस लकड़ी के गाड़े को लात मारकर दूर फेंक दिया है। जैसे ही रोते हुए बच्चे ने लकड़ी के गाड़े के पहिये पर अपने पैर मारे, तभी पहियों सहित लकड़ी का गाड़ा पूरी तरह से नष्ट हो गया। इसमें कोई संदेह नहीं है।
 
वहाँ उपस्थित ग्वाले और गोपियाँ आपस में विचार करने लगे कि यह घटना कैसे हुई? उन्होंने सवाल किया, "कहीं यह किसी राक्षस या अशुभ ग्रह का काम तो नहीं है?" उस समय वहाँ मौजूद छोटे-छोटे बच्चों ने ज़ोर देकर कहा कि बालक कृष्ण ने ही इस लकड़ी के गाड़े को लात मारकर दूर फेंक दिया है। जैसे ही रोते हुए बच्चे ने लकड़ी के गाड़े के पहिये पर अपने पैर मारे, तभी पहियों सहित लकड़ी का गाड़ा पूरी तरह से नष्ट हो गया। इसमें कोई संदेह नहीं है।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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