भक्तों के पास स्वचालित रूप से सभी रहस्यमय शक्ति होती है, लेकिन वे कृष्ण के साथ प्रतिस्पर्धा नहीं करना चाहते। इसके बजाय, वे पूरी तरह से कृष्ण के सामने आत्मसमर्पण कर देते हैं, और उनकी योगिक शक्ति कृष्ण की दया से प्रदर्शित होती है। भक्त रहस्यमय योग को इतना शक्तिशाली दिखा सकते हैं कि एक राक्षस इसका सपना भी नहीं देख सकता है, लेकिन वे इसे अपने व्यक्तिगत संतुष्टि के लिए प्रदर्शित करने का कभी प्रयास नहीं करते। वे जो कुछ भी करते हैं वह भगवान की सेवा के लिए होता है, और इसलिए वे हमेशा राक्षसों की तुलना में श्रेष्ठ स्थिति में होते हैं। ऐसे कई कर्मण, योगी और ज्ञानी हैं जो कृष्ण के साथ कृत्रिम रूप से प्रतिस्पर्धा करने की कोशिश करते हैं, और इस प्रकार साधारण, मूर्ख लोग जो प्राधिकरणों से श्रीमद-भागवतम् सुनने की परवाह नहीं करते हैं, कुछ बदमाश योगी को भगवान, ईश्वर का सर्वोच्च व्यक्तित्व मानते हैं। वर्तमान समय में अनेक तथाकथित बाबा हैं जो कुछ तुच्छ रहस्यमय आश्चर्य दिखाकर खुद को भगवान के अवतार के रूप में प्रस्तुत करते हैं, और मूर्ख लोग ज्ञान की कमी के कारण उन्हें भगवान मानते हैं।
