इति खरपवनचक्रपांशुवर्षे
सुतपदवीमबलाविलक्ष्य माता ।
अतिकरुणमनुस्मरन्त्यशोचद्
भुवि पतिता मृतवत्सका यथा गौ: ॥ २४ ॥
अनुवाद
ऐसे-ऐसे प्रबल बवंडर उठने से, धूल भरी आँधी के कारण माता यशोदा को न तो अपने पुत्र का कोई पता चल पाया, न ही वो कुछ समझ पाईं। इसीलिए वे ज़मीन पर इस तरह गिर पड़ीं जैसे कोई गाय अपने बछड़े को खो चुकी हो। वे बहुत ही करुण स्वर में विलाप करने लगीं।
Due to the storm caused by the strong tempest, mother Yashoda could neither find any trace of her son nor could she understand the reason. She fell on the ground like a cow that has lost its calf. She started wailing with great sorrow.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥