श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 7: तृणावर्त का वध  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  10.7.21 
गोकुलं सर्वमावृण्वन् मुष्णंश्चक्षूंषि रेणुभि: ।
ईरयन् सुमहाघोरशब्देन प्रदिशो दिश: ॥ २१ ॥
 
 
अनुवाद
उस असुर ने प्रबल बवंडर के रूप में सारे गोकुल को धूल के कणों से ढक दिया, जिससे सभी की दृष्टि ढक गई। वह भयावनी आवाज करता हुआ चारों दिशाओं को कँपाने लगा।
 
That demon, in the form of a strong tornado, covered the entire Gokul region with dust particles, obscuring the vision of all the people and began shaking all directions while making terrifying sounds.
तात्पर्य
तृणावर्त असुर ने बवंडर का रूप धारण किया और धूल के तूफान के साथ गोकुल नामक सारी भूमि को ढँक दिया, जिससे कोई निकटत्तम चीज को भी नहीं देख सकता था।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)